Thursday, 12 July 2018

मध्यप्रदेश की प्रमुख सांस्कृतिक संस्थाएं / Major Cultural Institutions of Madhya Pradesh


मध्यप्रदेश तुलसी अकादमी :- इसकी स्थापना 1987 में की गई इसका मुख्य उद्देश्य तुलसी साहित्य का अन्वेषण प्रचार प्रसार और संरक्षण करना है इसके लिए अकादमी द्वारा व्याख्यान,माला, परिचर्चा, संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाता है इस अकादमी के अंतर्गत चित्रकूट में तुलसी शोध संस्थान कार्यरत है !

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी :- इसका गठन 1976 में किया गया प्रदेश में उर्दू साहित्य के अध्ययन के लिए अकादमी द्वारा विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है !

मध्य प्रदेश सिंधी साहित्य अकादमी :- इसकी स्थापना 1983 में की गई इसका मुख्यालय भोपाल में स्थित है यह अकादमी सिंधी भाषा के साहित्य पर परिचर्चा, विचार गोष्ठी, व्याख्यानमाला सिंधी नॉटय प्रस्तुति का आयोजन करती है तथा सिंधी प्रतिनिधि नामक पत्रिका का प्रकाशन करती है  !

मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी :- मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत इस अकादमी की स्थापना 1969 में की गई यह आदमी विश्व विद्यालय स्तरीय पुस्तकों के हिंदी में प्रकाशन का कार्य करती है द्विमासिक पत्रिका "रचना" का प्रकाशन भी करती है !

पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय (अकादमी) मध्यप्रदेश:- इस अकादमी की स्थापना 1956 में की गई थी जबकि 1975 से स्थापित राजकीय अभिलेखागार संचालनालय का सिविलियन 16 अगस्त 1994 में किया गया इस संचालनालय का मुख्य कार्य प्रदेशभर में बिखरी पड़ी हुई पुरातत्व संपदा का संरक्षण चिन्हांकन संरक्षण एवं प्रदर्शन एवं अनुसरण करना है !

रविंद्र भवन भोपाल :-  यह मध्यप्रदेश का नही बल्कि भारत के सर्वश्रेष्ठ नाट्य ग्रहों में से एक है प्रशासनिक दृष्टि सही है भवन राजभाषा एवं संस्कृति संचालनालय के अंतर्गत कार्यरत है रविंद्र भवन में दो रंगमंच है एक सभागृह के भीतर अंतः रंगमंच और दूसरा बाहर का खुला रंगमंच ! सभाग्रह में 728 सीट है खुले रंग मंच के सामने लगभग 5000 दर्शक के बैठने की सुविधा है !

मराठी साहित्य अकादमी:-मध्यप्रदेश के गठन से ही प्रदेश के निर्माण में मराठी भाषियों का अपना एक स्थान एवं महत्व रहा है। मध्य भारत से मध्यप्रदेश के निर्माण के समय नागपुर तथा अन्य स्थानों से मध्यप्रदेश में आये में मराठीभाषी लोगों की संख्या बहुतायत में है।मराठीभाषी भोपाल, इन्दौर, उज्जैन, देवास, रतलाम, धार मन्दसौर, हरदा, खण्डवा, बुरहानपुर, होशंगाबाद, इटारसी, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, बैतूल, मुलताई आदि जिलों में बहुतायत से निवास करते हैं। मराठी संस्कृति एवं साहित्य को अक्षुण रखने तथा उन्हें बढ़ावा देने एवं उनका संवर्द्धन करने के उद्देश्य से साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् के अन्तर्गत मराठी प्रभाग वर्ष 2008 से कार्यरत था। वर्ष 2010 से इसका विस्तार करने हेतु मराठी साहित्य अकादमी का गठन शासन द्वारा किया गया।अकादमी द्वारा मराठी प्रभाग के गठन से ही मराठी साहित्य संस्कृति को बढ़ावा देने उनका संवर्द्धन करने तथा परम्परा को अक्षुण रखने के उद्देश्य से विभिन्न आयोजन किये जा रह है, जिससे प्रदेश में निवासरत मराठी भाषियों को स्थाई मंच प्राप्त हो सके साथ ही प्रदेश से बाहर की पारंपरिक कलाओं से भी प्रदेश के मराठीभाषी एवं अन्य लोगों को अवगत कराया जा सके।


फिल्म विकास निगम:- मध्यप्रदेश फिल्म विकास निगम की स्थापना भोपाल में की गई इसका प्रमुख कार्य फिल्म समारोह विदेशी भाषा की उत्कृष्ट फिल्मों का समारोह,सिनेमा हॉल का निर्माण,वृत्तचित्र, फिल्म क्लब,वीडियो क्लबों का निर्माण करना आदि है !

मध्य प्रदेश की साहित्य परिषद भोपाल :- इसकी स्थापना 1954 में की गई इसका प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में हिंदी साहित्य के प्रोत्साहन के संरक्षण हेतु नए रचनात्मक एवं आलोचनात्मक साहित्य का प्रकाशन साहित्य सम्मेलन परिचर्चा गोष्ठियों आदि है !
मध्य प्रदेश के प्रमुख सृजन पीठ
1.
निराला सृजन पीठ, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल !
2. प्रेमचंद सृजन पीठ, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन !
3. मुक्तिबोध सृजन पीठ, हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर !
4. सुभद्रा कुमारी चौहान सृजनपीठ,जबलपुर !